Himanshu Kumar
एक पेड़ पर बहुत सारे बन्दर रहते थे

फलदार शाखाओं पर मोटे और ताकतवर बंदरों नें कब्ज़ा कर लिया था
बाकी के बंदर कमज़ोर और बेआवाज़ हो गए थे
कमज़ोर बंदरों में नयी पीढ़ी आयी
उन्होंने कहा कि पेड़ के फलों के खाने में बराबरी होनी चाहिये
मोटे बंदरों में बैचैनी फ़ैल गयी
उन्होंने कहना शुरू किया कि ये फलों में बंटवारे की बात करने वाले कम्युनिस्ट बंदर हैं हैं
और कम्युनिस्ट बंदर देशद्रोही होते हैं
मोटे बंदरों नें कहा कि फलदार शाखों पर वही कब्ज़ा करेगा जो पेड़ माता की जय बोलेगा
कमज़ोर बंदरों नें कहा कि मुद्दा पेड़ माता की जय का है ही नहीं
मुद्दा है कि सारे बंदर बराबर फल खायेंगे या नहीं
लेकिन मोटे वाले बंदर पेड़ माता की जय – पेड़ माता की जय का शोर मचाने लगे
और फलों के बराबर बंटवारे की मांग पर से सबका ध्यान हटा दिया
लेकिन फलों के बराबर बंटवारे की की मांग लगातार बढ़ती जा रही थी!!

……

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