एक प्रश्न है, जो सचमुच इस पल बहुत उद्वेलित कर रहा है। इसका उत्तर चाहिए –
‘विजय माल्या ‘देशद्रोही’ है, या ‘देशभक्त’ ?
विजय माल्या ‘नेशनलिस्ट’ है, या ‘एंटीनेशनलिस्ट’ ?
वह ”हिंदुत्ववादी’ है, या ‘हिंदुत्व-विरोधी’ ?
वह ‘भारतीय’ है, या ‘प्रवासी’ ? एन आर आई ?
क्या वह किसी न्यायालय परिसर में कभी आयेगा, तो क्या कन्हैया की तरह उस पर कोई जानलेवा हमला करेगा ?
अर्नब गोस्वामी, सुधीर चौधरी, सरदाना, चौरसिया और उनके मालिकान क्या उसके बारे में वैसा ही अमर्यादित और संगीन रवैया अपनाएँगे ?
क्या वह जो ८००० करोड़ रुपये लेकर भागा है, जो निस्सन्देह ग़रीब भारतीय जनता के टैक्स का ही रुपया था, जिसे भारतीय बैंकों ने उसे क़र्ज़ पर दिया था, वह क्या कभी वसूल होगा ?
क्या इस सवाल पर गुंडे लोग उसी तरह अभियान चलायेंगे, जैसा वे हम लोकतांत्रिक नागरिकों के विरुद्ध चलाते हैं?
भारतीय बहू-बेटियों के प्रति शराब विक्रेता विजय माल्या का रवैया क्या हिंदुत्ववादी संघ की विचारधारा के अनुरूप है ?
माल्या के बारे में गिरिराज सिंह, महेश शर्मा, अनुपम खेर, साध्वी प्राची, मोहन भागवत, जनरल बख़्शी, सुभाष चंद्र, नरेंद्र कोहली आदि की क्या राय है? क्या इनका वक्तव्य कभी आयेगा ?
श्री श्री , बाबा रामदेव, आसाराम बापू आदि क्या माल्या के बारे में कोई देशभक्ति से संपन्न आध्यात्मिक संदेश देश के हिंदुओं को देंगे ?
क्या कभी सचमुच माल्या भारत आकर सारी लूट लौटायेगा? या सब कुछ ‘वेव ऑफ’ कर दिया जायेगा ?
किसका देश है ये ?
और प्रधानमंत्री क्या इस देश की सवा सौ करोड़ जनता का ही है ?
मन उद्विग्न है।
प्रश्न ही प्रश्न हैं।
उत्तर ‘भक्तों’ से नहीं, उनके आराध्य हुक्मरानों से चाहिए।
दुखद।
Uday Prakash

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