“धर्म जब राजनीति के साथ घुल-मिल जाता है तो वह एक घातक विष बन जाता है, जो राष्ट्र के जीवित अंगों को धीरे-धीरे नष्ट करता है…..जनता के हौसले पस्त करता है, उसकी दृष्टि को धुंधला बनाता है, असली दुश्मन की पहचान करना मुश्किल कर देता है ।”

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