जब गतिरोध की स्थिति लोगों को अपने शिकंजे में जकड लेती है तो किसी भी प्रकार की तब्दीली से वे हिचकिचाते है ।इस जडता और निष्क्रियता को तोड़ने के लिए एक क्रांतीकारी स्पिरिट पैदा करने की जरूरत होती है, अन्यथा पतन और बर्बादी का वातावरण छा जाता है ।

लोगो को गुमराह करने वाली प्रतिक्रियावादी शक्तियाँ जनता को गलत रास्ते पर ले जाने मे सफल हो जाती है । इससे इंसान की प्रगति रूक जाती है और उसमे गतिरोध आ जाता है । इस परिस्थिति को बदलने के लिए यह जरूरी है कि क्रान्ति की स्पिरिट ताजा की जाये, ताकि इंसानियत की रूह मे हरकत पैदा हो ।

भगतसिंह

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