मानवता की सबसे बड़ी बीमारी पूंजीवाद है और इसका इलाज किसी जेनेरिक या ब्रांडेड दवा में नहीं बल्कि इस सड़ी हुई व्यवस्था को क्रांति रूपी ऑपरेशन से काट कर अलग कर देने में है. मानव और मानवता को बचाव इस व्यवस्था में सुधार के रास्ते नहीं बल्कि इस पूरी व्यवस्था को समूल उखाड़ कर और मेहनतकश का लोक स्वराज कायम करके ही हो सकता है.

Well said!

To Speak and To Live

medicine-moneyचिकित्सा विज्ञान के विकास के हर पड़ाव के साथ मानव ने बीमारियों पर विजय की नई बुलंदियों को छुआ है. खासतौर परपिछले 100 साल में इस क्षेत्र में लम्बी छलांग लगाई गई है. आज मानव के पास अधिकतर बीमारियों से लड़ने के लिए दवाओं का जखीरा मौजूद है. इतनी दवाओं के निर्माण और उपलब्धता के चलते होना तो यह चाहिए था कि हर नागरिक को हर तरह की दवा समय पर और मुफ्त में उपलब्ध हो. लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है. अधिकतम जनसंख्या को जरूरी दवाएं तक उपलब्ध नहीं हैं. और जहाँ उपलब्ध हैं वहां अधिकतर लोगों की पहुँच नहीं है. किसी समय मानवीय कहा जाने वाला यह पेशा आज मुनाफा आधारित, अमानवीय और निर्मम खूनचूसू तंत्र में तब्दील हो चुका है. दवा कंपनियों से लेकर डॉक्टर और सरकार तक इस पूरे मकड़जाल को बुनने में एकजुट हैं. हर तरह के खोखले नैतिकतापूर्ण भाषणों और अपीलों के बावजूद यह गोरखधन्धा तेजी…

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