Signs of Fascism whose base is always economy! Military rule and crushing people’s revolt only when they can not be crushed by normal means!

1. सरकारी खर्च में कटौती और वित्तीय घाटा पर पूर्ण बंदिश

2. आम जनता को राहत पहुँचाने वाले तमाम कार्यक्रमों पर क्रमशः रोक

3. कृषि, उद्योग और सेवा सभी क्षेत्रों में से सरकार द्वारा अपने हाथ खींच लेना

4. श्रम मानकों को सख़्त और पूंजी मानकों को लचीला बनाना

5. श्रम क़ानूनों को क्रमशः लचीले होते पूंजी के मानकों व हितों के अनुरूप ढालते चले जाना

5. संगठित और औपचारिक क्षेत्र को क्रमशः छोटा बनाते हुए उसे पूंजी के साथ जोड़े व मिलाए रखना

6. असंगठित व अनौपचारिक क्षेत्र के दायरे को बढ़ाते हुए उसका अमानवीय शोषण की खुली छूट

7. पूंजी और ख़ासकर बाज़ार को अपने अंधे और अतर्किक नियमों को खुली छूट

8. कल्याणकारी कार्यक्रमों और सरकार की सामाजिक ज़िम्मेदारियों से क्रमशः पूर्ण वापसी…

9. और इससे निर्मित ग़रीबों व कंगालो की फ़ौज़ को पूंजी की सेवा हेतु जीवित रखने की ज़िम्मेवारी से भी मुँह मोड़ लेने की प्रवृति.

Present railway and common budget of BJP government is clear sign of that!

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